नई दिल्ली: राष्ट्रपति चुनाव के मैदान में प्रणब मुखर्जी के सामने क्या कोई दूसरा उम्मीदवार होगा और अगर होगा तो कौन, ये सवाल अभी बना हुआ है क्योंकि एनडीए की बैठक बेनतीजा खत्म हो गई है.

बीजेपी नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए अपनी बैठक में राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा करने पर कोई निर्णय नहीं ले पाया. गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेद उस समय खुलकर सामने आ गए, जब शिव सेना ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया.

बैठक में, गठबंधन सहयोगियों और गठबंधन के बाहर की पार्टियों के विभिन्न विचारों के मद्देनजर बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को इस बात के लिए अधिकृत किया गया है कि गठबंधन की अगली बैठक से पहले वह एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य दलों से गहन विचार-विमर्श करें.

एनडीए संयोजक शरद यादव ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन सहयोगियों ने राष्ट्रपति चुनाव पर विस्तृत बातचीत की और तय किया कि निर्णय लेने के लिए एनडीए की अगली बैठक होने से पहले आडवाणी सभी घटकों से बातचीत करें.

यादव ने हालांकि कहा कि बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा नहीं हुई. उपराष्ट्रपति का चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बाद इसी साल होने वाला है.

आडवाणी के आवास पर चली दो घंटे की बैठक में जद (यू), शिरोमणि अकाली दल, हरियाणा जनहित कांग्रेस और बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया.

शिवसेना बैठक का हिस्सा नहीं

शिव सेना ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि वह सम्भवत: एनडीए द्वारा राष्ट्रपति चुनाव पर तत्काल निर्णय न लेने को लेकर नाराज है.

शिव सेना पीए संगमा को एनडीए द्वारा समर्थन दिए जाने के भी खिलाफ है, जिन्हें ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की प्रमुख जे. जयललिता और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक ने उम्मीदवार के रूप में पेश किया है.

कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए ने प्रणब मुखर्जी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. मतदान 19 जुलाई को होना है, जिसके लिए नामांकन पत्र 30 जून तक दाखिल किया जाएगा.


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