वॉशिंगटन: मशहूर पत्रिका टाइम और सीएनएन ने अपने स्तम्भकार और टेलीविजन प्रस्तोता फरीद जकारिया को निलंबित कर दिया है. जकारिया पर आरोप है कि उन्होंने किसी दूसरे लेखक के लेख का हिस्सा अपने लेख में छाप दिया था.
जकारिया के लेख 'द केस फॉर गन' के कुछ हिस्सें 23 अप्रैल को समाचार पत्र 'द न्यू यॉर्कर' में इतिहासकार जिल लेपोरे के बंदूकों पर लिखे गए लेख से मेल खाते हैं. इन समानताओं को रूढ़िवादी वेबसाइट 'न्यूजबस्टर्स' ने पकड़ा. जकारिया भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार हैं.
भारत में पैदा हुए 48 साल के जकारिया ने शुक्रवार दोपहर एक बयान जारी कर कहा, 'मीडिया संवाददाताओं ने बताया है कि टाइम पत्रिका में छपे मेरे लेख के कुछ हिस्सों में 23 अप्रैल को समाचार पत्र 'द न्यू यॉर्कर' में इतिहासकार जिल लेपोर के छपे लेख से समानताएं हैं. वे सही हैं. मैंने बहुत बड़ी गलती की. यह एक गंभीर चूक है और इसमे पूरी तरह से मेरी गलती है. मैं जिल, टाइम में मेरे संपादक और मेरे पाठकों से खुलकर माफी मांगता हूं.'
टाइम ने कहा कि जकारिया के लेख एक महीने के लिए निलंबित किया गया है, समीक्षा लंबित है. पत्रिका के प्रवक्ता अली जेलिंको ने बताया, 'टाइम ने फरीद की माफी स्वीकार कर ली है, लेकिन जो उन्होंने किया वह हमारे लेखकों के मानकों को खराब करने वाला है.'
सीएनएन की तरह टाइम पत्रिका का संचालन करने वाली कपंनी टाइम वार्नर ने एक बयान में कहा, 'हम फरीद जकारिया के टाइम स्तम्भ की समीक्षा कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने माफी मांगी है. ब्लॉग पर प्रकाशित पोस्ट को हटा दिया गया है और जब तक इस मामले की समीक्षा चल रही है, उस वक्त तक सीएनएन ने फरीद जकारिया को निलम्बित कर दिया गया है.'
इससे पहले इस साल जकारिया को हार्वर्ड में शुरुआती भाषण देने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था. यह भाषण पूर्व में ड्यूक में दिए गए भाषण से बहुत मिलता-जुलता था.
भारतीय मूल के पत्रकार फरीद ज़कारिया टाइम से सस्पेंड







